बस्ती।
नाबालिग बालिका को बरामद करने के बाद एक रात महिला थाना तथा एक रात सोनहा
थाना पर रोकने तथा इसके बाद न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के मामले में
न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने मुकामी थाना के बाल कल्याण अधिकारी
तथा मामले के विवेचक से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके लिए उन्हे 15 अप्रैल तक
का समय दिया गया है।
बताते चलें कि उक्त थाना
क्षेत्र के एक गांव के निवासी व्यक्ति ने अपनी पुत्री के घर से गायब होने
की सुचना थाने में दर्ज करवाया था। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए
अभियुक्त के साथ ही बालिका को बरामद कर लिया। लेकिन बारामदगी के बाद भी
विवेचक ने बालिका को न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नही
किया, बालिका को बिलंब से प्रस्तुत करने के नाते बालिका के मेडिकल जांच के
साथ ही कौंसलिंग में देरी हुई जिससे बालिका का सर्वोच्च हित प्रभावित हुआ
है। इतना ही नहीं बाल अधिनियम 2015 के अनुसार किसी भी नाबालिग को थाने में
नही रोका जा सकता है, लेकिन पुलिस ने बाल अधिनियम की अनदेखी करते हुए
बालिका को एक रात महिला थाना तथा एक रात सोनहा थाना पर रोके रखा गया।
बालिका ने कौंसलिंग के दौरान बताया कि उसे अंबेडकर नगर के एक गांव से 3
अप्रैल को बरामद किया गया था और इसके बाद उसे थाने पर रखा गया, न्याय पीठ
के समक्ष उसे 5 अप्रैल को को न्याय पीठ के सदस्य डा संतोष श्रीवास्तव के
सम्मुख 4 बजकर दस मिनट पर पेश किया गया इसके बाद उसके मेडिकल जांच आदि की
कार्यवाही शुरू की गई। मामले की गम्भीरता को देखते हुए सी डब्लू सी के चेयर
पर्सन प्रेरक मिश्रा सदस्य अजय श्रीवास्तव, डा संतोष श्रीवास्तव, मंजू
त्रिपाठी ने जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया
है। अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि हमारे लिए बाल हित सर्वोपरि है उसके
साथ किसी को भी मनमानी करने का अधिकार नहीं है।
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