अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में ‘स्त्री विमर्श प्रगति औऱ परम्परा’ विषय पर विमर्श
बस्ती। प्रगति औऱ परम्परा के संतुलन से ही परिवार औऱ समाज सही दिशा की ओर बढ़ पायेगा। उपरोक्त विचार आयोजित वेविनार में विचारकों ने कही। अवसर था प्रेरणा के मंच पर अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विमर्श का, जिसका विषय था ‘स्त्री विमर्श प्रगति औऱ परम्परा’।
कार्यक्रम की शुरुआत रचनाकार औऱ कार्यक्रम की संचालिका प्रेरणा सिंह के द्वारा हुआ। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सहसंयोजक के रुप में साहित्यकार मयंक श्रीवास्तव ने प्रश्नों के क्रम को शानदार ढंग से संचालित किया। उन्हांने प्रसिद्ध गीतकार कुमार आनंद के शीर्षक गीत से कार्यक्रम के औचित्य को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में अतिथियों के रूप में मिसेज़ केन्या 2021 रूही सिंह, सौंदर्य प्रतियोगिता में मिसेज इंडिया गाडेस पैनलिस्ट वाटिका नौरियाल, रचनाकार रश्मि सिंह, रेड ब्रिगेड से उषा विश्वकर्मा, अंतराष्ट्रीय धाविका नीलू मिश्रा औऱ स्वरंजलि ग्रुप से शिवानी श्रीवास्तव ने प्रतिभाग किया।
रूही ने बड़ी खूबसूरती से अपने विचारों को बताते हुए कहा कि जो परम्परायें हमारे उद्देश्यों में अडचने डालती है उन्हें छोड़ना प्रगति के साथ न्याय होगा। वही वाटिका नौरीतल ने कहा कि मन की सुंदरता औऱ मज़बूत लक्ष्य हमें हमारा मुकाम देने में सहायक सिद्ध होते है औऱ जीत का यही मूलमंत्र है।
जीवन के संघर्षो से लड़ती हुई उषा विश्वकर्मा ने अपनी बात बड़ी बेबाकी से रखी औऱ बताया कि शर्म करने से परेशानी खत्म नहीं होती हमें उठ खड़ा होना पड़ता है हमने रेड ब्रिगेड बनाकर लाखो लोंगो के जीवन में मज़बूत आधार दिया है। वही नीलू मिश्रा ने कहा कि कोई भी शुरूआत कभी भी हो सकती है जैसे कि उन्होंने आठ वर्षो की बीमारी के बाद फील्ड में उतरी औऱ देश के लिए मेडल ला रही है।
गायकी में एक बेहतर मुकाम पा चुकी शिवानी ने भी बीस वर्षो के बाद गाना शुरु किया औऱ आज़ देश के तमाम बड़े कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दे रही है, उनके गाये गीत ‘काहे को ब्याहे विदेश अरे लखिया’ लोंगो ने बहुत सराहा।
वही वरिष्ठ साहित्यकार रश्मि सिंह ने निर्भया कांड पर अपनी मार्मिक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि हमे कुछ बदलने की जरूरत नहीं हम जिस रूप में हैं उसी में आत्मसम्मान से जीन सीखें। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन स्कूल में वह आम परिवारों के बच्चियों को सशक्त कर रही है।
कार्यक्रम की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि लोग लगातर लोग जुड़े रहे औऱ अपने मेसेज से इसे औऱ भी अधिक लोकप्रिय बना रहे थे। जो कार्यक्रम को तकनीकी रूप से रोशन ने अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में संचालक द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।.
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